श्रीमद भगवतगीता

एक अभ्यास जो मानव को साधना से चेतना तक की अद्भुत यात्रा पर ले जाता है। जब मनुष्य स्वयं को साधने के लक्ष्य के साथ इस परम यात्रा पर निकलता है तो इसकी शुरुआत अपने मन को साधने से करनी होती है।